“पहले इतना प्यारा बच्चा था, अब हर बात पर चिल्लाता है…”
यह वाक्य आज कई भारतीय माता-पिता कहते हैं।
किशोर अवस्था (Teenage) में बच्चों का माता-पिता के प्रति आक्रामक होना बहुत परेशान करने वाला अनुभव हो सकता है। कई बार तो माता-पिता खुद को असहाय, दोषी या असफल महसूस करने लगते हैं।
भारतीय घरों में यह वाक्य बहुत आम है—
“इसे ज़्यादा प्यार मत करो, बिगड़ जाएगा।”
दादा-दादी हों, रिश्तेदार हों या पड़ोसी—अक्सर माता-पिता को डराया जाता है कि बहुत प्यार, बहुत ध्यान या बच्चों की भावनाओं को समझना उन्हें ज़िद्दी, आलसी या बिगड़ैल बना देगा।
आज लगभग हर भारतीय घर में यह सवाल गूंजता है—“बच्चा मोबाइल माँगता है तो क्या करें?”
कभी खाना खिलाने के लिए, कभी चुप कराने के लिए और कभी “थोड़ी देर” के बहाने मोबाइल बच्चे के हाथ में चला जाता है। फिर धीरे-धीरे यही “थोड़ी देर” आदत बन जाती है।
जब माता-पिता पहली बार अपने बच्चे को झूठ बोलते पकड़ते हैं, तो सबसे पहले गुस्सा आता है — “इतनी छोटी उम्र में झूठ?”
लेकिन सच यह है कि झूठ बोलना बच्चों के विकास (development) का एक सामान्य चरण हो सकता है। यह हर बार बुरी आदत या खराब संस्कार का संकेत नहीं होता।
“मेरा बच्चा मेरी एक भी बात नहीं मानता”
“कहने पर भी वही करता है जो उसका मन करता है”
यह शिकायत आज लगभग हर Indian parent करता है।
कभी छोटा बच्चा ज़िद करता है, तो कभी बड़ा बच्चा जवाब देने लगता है। ऐसे में माता-पिता के मन में गुस्सा, frustration और guilt—तीनों आ जाते हैं।
“मेरा बच्चा अभी बोल क्यों नहीं रहा?”
“इस उम्र में तो बच्चे बोलने लगते हैं, मेरा बच्चा पीछे क्यों है?”
यह सवाल आज लगभग हर दूसरे Indian parent के मन में होता है। खासकर जब आसपास के बच्चे बोलने लगते हैं और आपका बच्चा सिर्फ़ इशारों या आवाज़ों तक सीमित रहता है।